Monday, August 5, 2019

Article 35 A & 370 removed, A historical day of Indian History:- August 5,2019

नमस्कार दोस्तों,

जैसा कि मोदी सरकार 2.0 से उम्मीद को जा रही थी कि वो आर्टिकल 35A पर कुछ फैसला लेंगे,वैसा ही हुआ।

5 अगस्त 2019 हिंदुस्तान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में याद की जाएगी।

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मोदी सरकार ने आमजनमानस में राष्ट्रवाद की भावना को जगाया है और निरन्तर राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए अग्रसर है। आज देश का हर व्यक्ति खुद को भारतीय कहने में गौरवान्वित महसूस करता है। महँगाई,कानून व्यवस्था जैसी समस्याओं पर भी मोदी सरकार ने तेजी से रोक लगायी है। जीवनयापन की समस्त वस्तुओं पर कड़ा नियंत्रण किया है।

जमीन से लेकर आसमान तक,खेल से लेकर राजनीति तक,किसान से लेकर विज्ञान तक हर जगह भारतीय अपना झण्डा फहरा रहे है और देशवासियों को गौरवान्वित कर रहे हैं।

अखण्ड भारत के सपने को पूरा करने के लिए अनगिनत जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी और आज वो सपना पूरा हो गया है।

आप मे से बहुत लोग सोंच रहे होंगे कि क्यों इस विषय पर इतनी बात की जा रही हों तो इसके लिए आपको आर्टिकल 35A के विषय मे जानना होगा।

आर्टिकल 35A क्या है ?


जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार, संविधान में परिशिष्ट(Appendix) के तौर पर डाले गए आर्टिकल 35A से तय होते हैं।

आर्टिकल 35A के तहत जो लोग 14 मई 1954 के पहले कश्मीर में बस गाए थे, केवल वही कश्मीर के स्थायी निवासी है।
केवल स्थायी निवासियों को ही राज्य में जमीन खरीदने, सरकारी रोजगार प्राप्त करने और सरकारी योजनाओ में लाभ लेने के अधिकार मिले हैं।
किसी दूसरे राज्य का निवासी कश्मीर में जाकर स्थायी निवासी के तौर पर न जमीन खरीद सकता है,न ही राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है। इसके अलावा, कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर लेती है तो उसके अधिकार छिन जाते है परंतु पुरुषों के मामले में ये नियम अलग हैं।

आर्टिकल 35A का जिक्र संविधान में है या नहीं ?

आर्टिकल 35A का जिक्र संविधान में नहीं है दरअसल इसे संविधान के मुख्य भाग में नहीं बल्कि परिशिष्ट(Apendix) में शामिल किया गया है जिसे जवाहरलाल नेहरू की सहमति पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद के आदेशानुसार संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गया।

35A हटाना क्यों जरूरी था ?

सबसे पहले तो आपको ये जानना जरूरी है को आर्टिकल 35 A संसद के जरिये लागू नहीं किया गया था।
इस अनुच्छेद की वजह से पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर की नागरिकता नहीं है,इनमें से 80 फीसदी लोग हिन्दू(दलित और पिछड़े समाज) हैं। भारतीय नागरिकों के साथ कश्मीर में भेदभाव होता है औऱ संविधान से मिले अधिकार खत्म हो जाते हैं।

इसलिए दोस्तो इस अनुच्छेद का हटना बहुत जरूरी था।

अब थोड़ा सा धारा 370 के विषय में भी जान लें ।

जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता है औए उनका झण्डा भी अलग है।
वहाँ पर राष्ट्रीय ध्वज या प्रतीकों के अपमान को अपराध नहीं माना जाता है। देश के सुप्रीम कोर्ट के सभी आदेश जम्मू-कश्मीर में मान्य नहीं होते हैं।
संसद जम्मू-कश्मीर को लेकर सीमित क्षेत्र में ही कानून बना सकती है। रक्षा,विदेश,संचार छोड़कर केंद सरकार के कानून वहाँ लागू नहीं होते है। यदि केंद्र को कोई कानून लागू करना है तो जम्मू-कश्मीर बिधानसभा से सहमति जरूरी है।

वित्तीय आपातकाल के लिए संविधान की धारा 360,356 लागू नहीं।
राष्ट्रपति राज्य का कानून बर्खास्त नहीं कर सकते।
कश्मीर में हिन्दू-सिखों को 16% आरक्षण नहीं।
जम्मू-कश्मीर में 1976 का शहरी कानून लागू नही होता है।

धारा370 को वजह से जम्मू-कश्मीर में RTI औऱ RTE लागू नहीं होती।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल 5के बजाय6 वर्षों का होगा है।


*अनुच्छेद-370 खत्म होने से होगा ये 10 परिवर्तन *


*1. अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन लेकर बस सकेंगे।*

*2. कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं होगा। मतलब वहां भी अब तिरंगा शान से लहराएगा।*

*3. अनुच्छेद-370 के साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान भी इतिहास बन गया है। अब वहां भी भारत का संविधान लागू होगा।*

*4. जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों की दोहरी नागरिकता समाप्त हो जाएगी।*

*5. जम्मू-कश्मीर के दो टुकड़े कर दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग राज्य होंगे।*

*6. दोनों नए राज्य जम्मू-कश्मीर व लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होंगे।*

*7. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। मतलब जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार बनेगी, लेकिन लद्दाख की कोई स्थानीय सरकार नहीं होगी।*

*8. जम्मू-कश्मीर की लड़कियों को अब दूसरे राज्य के लोगों से भी शादी करने की स्वतंत्रता होगी। दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।*

*9. अनुच्छेद-370 में पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 1965 तक जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल की जगह सदर-ए-रियासत और मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री हुआ करता था।*

*10. अनुच्छेद-370 को खत्म करने की मंजूरी राष्ट्रपति ने पहले ही दे दी थी। दरअसल ये अनुच्छेद पूर्व में राष्ट्रपति द्वारा ही लागू किया गया था। इसलिए इसे खत्म करने के लिए संसद से पारित कराने की आवश्यकता नहीं थी।*


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3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (07-08-2019) को "पूरे भारतवर्ष में, होगा एक विधान" (चर्चा अंक- 3420) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Nitish Tiwary said...

बहुत सुंदर जानकारी के साथ सार्थक पोस्ट।

Lucifer said...

Nice it helps us to get the knowledge regarding the 370 in jammu and Kashmir
It was a great step and it will help in j&k development.. especially impact the terrorism ..