Is Nivea Cream best for all types of skin ?

 Best and Budget cream with high results!! See all the differences.
Reviewed in India on 27 December 2019
Style: Pack of 1Pattern: Multi Purpose Creme
To know everything (usage and differences),Kindly read the review till end.

My Story is very funny about the  experience with this valuable Cream.

Image credit--

My GF now wife told me about her skin problem. She tried many famous creme but no result. Then I took responsibility to find-out a suitable creme for her. 
I am a regular user of Amazon so I tried to find out the suitable cream on Amazon.The reviews of the products are very helpful.

I spent almost 5 days( more than 12 hours) to read different kind of reviews to find out the exact cream. Finally I stopped my search on this NIVEA Crème, All Season Multi-Purpose Cream, 200ml and placed the order on 20 January 2017.
She found it very useful after some usage and now we are regular user of this creme.

Really Amazing Cream. If you are a family of 5 it's 200ml pack is sufficient to fulfill the winter season in North India.

My skin is oily but later I started using on her request and the results are best . So it's all Skin Types. No matter what type of skin you have.

She use it in every season then I came to know that it's All Season Multi-Purpose Cream. That's also the best part.

Initially I found it sticky but now I am habitual and the results are superb. For best results you must follow the proper procedure to use it.
Step 1:-
Scoop product with clean hands.
Step 2:-
Rub it on your palms to spread evenly.
Step 3:-
Gently massage all over your face and body.
Step 4:-
Use daily for soft, smooth skin.

For more better results use it in night(or anytime) before go to bed. Simply wash your face and hand gently then apply the cream as per the steps mentioned above.

I don't recommend to use it before party or any occasion because you may feel sticky. For better results kindly follow the process explained above.
If you use this cream properly before go to bed, you will not require the lip balm as well because it will keep your lips smooth.
NIVEA Creme is a good moisturizer. However, it is sticky and looks greasy on oily skin. If you have oily skin, you can't handle it in summer everytime however it can be used in night before bed.

Some people think that it will help you to change the color of your skin but it's not fact. NIVEA never claimed that.
(except whitening and tanning lotions) do not have any influence on the colour of the skin. So don't think more about that. However it will give smooth tone to the face which is plus point.

I didn't see anyone having issues with this cream . In case you feel burning, stinging, redness, or irritation persist or worsen, tell your doctor or pharmacist promptly.

Overall it's best and budget cream. Simply use it as per the prescribed procedure and get best results.


The main difference between NIVEA Creme and NIVEA Soft is their formula.

NIVEA Creme is a water-in-oil emulsion.

This means it contains a number of water droplets embedded in oil. As a result, your skin first receives intensive care from the outer oil phase and then is supplied with moisture.

In contrast, NIVEA Soft is an oil-in-water emulsion.

This formula contains small oil droplets that have been embedded in water. So, your skin absorbs the outer water phase of NIVEA Soft quickly and makes your skin feel instantly refreshed and moist.

Following this, the fine oil droplets care for your skin.


Firstly, NIVEA Creme and NIVEA Soft are suitable for every skin type. Your personal skincare needs and preferences will influence which product you need.


This luscious and thick cream is perfect for the following skincare needs:

Your skin needs overall intensive and rich care.
You have particularly dry areas of skin, such as your elbows, knees, hands or feet.
Your lips need an extra boost of moisture.
Your face breaks out in extremely dry, red patches.


This moisturiser is easier to spread and is ideal some other skin care needs, including:

Your entire body needs moisturising following a shower.
You need a fast absorbing moisturiser for on the go.
Your face requires light weight hydration.
You need a convenient daily hand cream.

Thank you

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एक ऐसा मंदिर जहाँ ब्राह्मण कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति नहीं करता है पूजा-अर्चना,जानिए ...........

ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ कुष्माण्डा।

Source credit :- Google

नवरात्रि में चौथे दिन देवी को माँ कुष्माण्डा के रूप में पूजा जाता है। माँ दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं माँ कुष्माण्डा।जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था,तब इन्हीं देवी ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी।इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा जाता है।इनकी मंद व हल्की हँसी के द्वारा ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्माण्डा नाम से अभिहित किया गया है। सृष्टि की रचना के बाद उसमें प्रकाश भी इन्हीं के कारण आया है,इसीलिए ये सूर्यलोक में निवास करती हैं।

कुष्माण्डा देवी मंत्र:-

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु मे।।

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अर्थ-  जो कलश मदिरा से भरा हुआ है, रुधिर अर्थात रक्त से लथपथ है। ऐसे कलश को माँ भगवती ने अपने दोनों कर कमलों में धारण किया है। ऐसी माँ कुष्माण्डा मुझे शुभता अर्थात कल्याण प्रदान करें।

माँ कुष्माण्डा का स्वरूप:-

कुष्माण्डा देवी को आठ भुजायें हैं,जिनमें कमंडल, धनुष-बाण,कमल पुष्प, शंख, चक्र,गदा और सभी सिद्धियों को देने वाली जपमाला है। देवी माँ के पास इन सभी चीजों के अलावा हाथ में कलश भी है,जो सूरा से भरा हुआ है और रक्त से लथपथ है। इनका वाहन सिंह है और इनके इस स्वरूप की पूजा करने पर भय से मुक्ति मिलती है। इन भक्ति से आयु, यश और आरोग्य की वृद्धि होती है।माता कुष्माण्डा सिंह पर सवार होती हैं।

पिण्ड के रूप में लेटी माँ, चरणों से करती हैं अमृत वर्षा,जो जल है अत्यंत फायदेमंद आँखों के लिए :-

कानपुर, उत्तरप्रदेश से करीब 40 किलोमीटर दूरी पर घाटमपुर तहसील में माँ कुष्माण्डा का मंदिर है। यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है। इसकी नींव सन 1380 में राजा घाटमदेव जी रखी थी।इसमें एक चबूतरे में माँ की मूर्ति लेटी थी। सन 1890 में घाटमपुर के कारोबारी चंदीदीन भुर्जी ने मंदिर का निर्माण करवाया था। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है।

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एक पिंड के रूप में लेटी हुई माँ कुष्माण्डा की प्रतिमा से लगातार पानी रिसता रहता है और जो भक्त उस जल को ग्रहण करता है उसका जटिल से जटिल रोग दूर हो जाता है। हालांकि यह अभी तक रहस्य बना हुआ है कि पिण्डी से जल कैसे निकलता है। कई वैज्ञानिकों ने शोध किया, लेकिन माँ के इस चमत्कार को खोज नहीं पाए।

अनोखा मंदिर जहाँ सिर्फ़ माली कराते हैं पूजा-अर्चना

माँ कुष्माण्डा देवी मंदिर में पुजारी कोई पण्डित नहीं है बल्कि माली ही पूजा कराते हैं। यहाँ दसवीं पीढ़ी के पुजारी माली श्री गंगाराम जी हैं जो माता रानी के दरबार में पूजा-पाठ करवाते हैं। सुबह स्नान-ध्यान कर माता रानी के पट खोलना, पूजा-पाठ के साथ हवन करना प्रतिदिन का काम है। मनोकामनाएं पूरी होने पर जो भक्तगण आते हैं, हवन पूजन करवाते हैं।

पूजा का महत्व :-

देवी कुष्माण्डा भय दूर करती हैं। जीवन में सभी तरह के भय से मुक्त होकर सुख से जीवन बिताने के लिए ही देवी कुष्माण्डा की पूजा की जाती है। देवी कुष्माण्डा की पूजा से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। इनकी पूजा से हर तरह के रोग, शोक औऱ दोष दूर हो जाते हैं। किसी तरह का क्लेश भी नहीं होता है। कुष्माण्डा देवी की पूजा से समृद्धि और तेज प्राप्त होता है।

लोककथा :-

श्री गंगाराम जी ने बताया कि करीब एक हजार साल पहले घाटमपुर गाँव जंगलों से घिरा था। इसी गाँव का एक ग्वाला कुढ़हा गाय चराने के लिये आता था। शाम के वक़्त जब वह घर जाता औऱ गाय से दूध निकालता तो गाय एक बूंद दूध नहीं देती। उसको शक हुआ औऱ उसने छिप कर देखा कि गाय एक स्थान पर सारा दूध गिरा देती है। ग्वाले ने उस स्थान पर जाकर प्रणाम किया तभी माँ ने प्रकट होकर ग्वाला से कहा कि मैं माता सती का चौथा अंश हूँ। ग्वाले ने यह बात पूरे गाँव को बताई औऱ उस जगह खुदाई की गई तो माँ कुष्माण्डा देवी की पिंडी निकली। गांववालों ने पिंडी की स्थापना वहीं करवा दी औऱ माँ की पिंडी से निकलने वाले जल को प्रसाद स्वरूप मानकर पीने लगे।

शिव महापुराण के अनुसार कथा:-

माता कुष्माण्डा की कहानी शिव महापुराण के अनुसार, भगवान शंकर की पत्नी सती के मायके में उनके पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। इसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था, लेकिन शंकर भगवान को निमंत्रण नहीं दिया गया था। माता सती भगवान शंकर की मर्जी के खिलाफ उस यज्ञ में शामिल हो गईं। माता सती के पिता ने भगवान शंकर को भला-बुरा कहा था, जिससे आक्रोशित होकर माता सती ने यज्ञ में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी। माता सती के अलग-अलग स्थानों में नौ अंश गिरे थे। माना जाता है कि चौथा अंश घाटमपुर में गिरा था। तब से ही यहीं माता कुष्माण्डा विराजमान हैं।

प्रसाद में पुआ, गुड़ और चना चढायें:-

श्री गंगाराम जी ने के अनुसार यदि कोई भक्त सूर्योदय से पहले स्नान कर छह: महीने तक इस नीर का इस्तेमाल किसी भी बीमारी में करे तो उसकी बीमारी शत प्रतिशत ठीक हो जाती हैं। साथ ही नवरात्रि में हर रोज भक्त माँ के दरबार में हाज़िरी लगाएँ और प्रसाद स्वरूप पुआ, गुण और चना चढ़ाए, कुष्माण्डा माता भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देती हैं।
देवी माँ को लाल वस्त्र, लाल पुष्प, लाल चूड़ी भी अर्पित करना चाहिए। देवी योग-ध्यान की देवी भी हैं। देवी का यह स्वरूप माँ अन्नपूर्णा का भी है। उदराग्नि को शान्त करती हैं। पूजन के बाद देवी के मंत्र का जाप करें।

फूलनदेवी और ददुआ भी माँ के थे भक्त :-

श्री गंगाराम जी ने बताया कि फूलन देवी भी माँ के दरबार मे नवरात्रि में एकदिन के लिये जरूर आती थी। फूलनदेवी ने आत्मसमर्पण की बात भी माँ के दरबार में कही थी। आज भी फूलनदेवी के माँ के दरबार में बाँधे घण्टे गवाही देते हैं। वहीं तकरीबन तीस सालों तक बीहड़ का शेर रहा ददुआ भी माँ का भक्त था। वह हर नवरात्रि को माता रानी के दर्शन करने करने के लिये आता था और कन्याओं को भोज कराता था।

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क्या होगा अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस की वजह से गए लॉकडाउन का असर ?

मोहब्बत में इंकलाब आ जाएगा।

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क्या असर होगा अर्थव्यवस्था पर लॉकडाउन का ?

वुहान से बीजिंग -  1051 कि.मी.
वुहान से ज़हेजिआंग- 608 कि.मी.
वुहान से हांगकांग- 918 कि.मी.
वुहान से शंघाई - 691कि.मी.

वुहान से अमेरिका(न्यूयॉर्क) -  12063कि.मी.
वुहान से हिंदुस्तान(दिल्ली) - 3583 कि.मी.
वुहान से इटली(रोम) - 8687कि.मी.
वुहान से ईरान - 5794कि.मी.
वुहान से ब्रिटेन - 8895कि.मी.

ये हैं कुछ आँकड़े जो बताते हैं चीन के वुहान शहर से उसके अन्य राज्यों और विश्व के तमाम देशों के बीच की दूरी। कुछ स्क्रीनशॉट्स भी संलग्न हैं जिनमें आप अन्य प्रमुख देशों और शहरों के बीच की दूरी भी देख सकते हैं।

इन आंकड़ों से आप आसानी से समझ सकते हैं कि इस कोरोना वायरस का असर चीन के अन्य राज्यों में न के बराबर देखने को मिला जबकि वो सब निकटवर्ती हैं और वहीं दूसरी ओर विश्व के तमाम बड़े विकसित देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था सब चरमरा चुकी है इस वायरस के कारण।
इटली और अमेरिका जैसे देशों के हालात बिल्कुल इमरजेंसी जैसे हो चुके हैं।
भारत में भी ये वायरस धीरे-धीरे अपने पैर पसार रहा है हालांकि भारत सरकार ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन  घोषित कर दिया है।

लेकिन इन सब बातों से हटकर क्या आपने सोंचा कि इतनी दूरी होने के बावजूद यह वायरस अन्य देशों में भयावह होता जा रहा है जबकि चीन अन्य निकटवर्ती राज्यों में इसका असर न के बराबर हैं ?
वहीं दूसरी ओर एक नए वायरस हन्ता का आगमन भी हो चुका जो चूहों के जरिये फैलता है हालांकि WHO से पुष्टि होना बाकी है लेकिन इन तरह के नए वायरसों का इंसानी दुनिया में संकेत है कि या तो ये प्रक्रति का कहर है या फिर चीन की गहरी साज़िश।

ऐसा प्रतीत होता है कि चीन के पास इस वायरस की वैक्सीन पहले से ही है लेकिन वो इंतेजार कर रहा है कि कब विश्व के अन्य देशों में स्तिथि विकराल हो औऱ हाहाकर मच जाए तब चीन उस वैक्सीन की सौदेबाज़ी कर सके। मेरी इस बात को आप ऐसे समझ सकते हैं कि चीन जैसा हिंदुस्तान विरोधी देश आज कह रहा है कि सिर्फ़ भारत इन वायरस से लड़ और जीत सकता है। ये साबित करता है कि कहीं न कहीं चीन सुरक्षित खेल खेलना चाहता है ।
महामारी बढ़ी तो चीन वैक्सीन बेच कर फायदा कमाएगा और अगर भारत ने इसपर विजय पा ली तो चीन यह कह कर दिल जीत लेगा कि हमें तो पहले से ही भारत पर भरोसा था।

हर स्तिथि में चीन सहानुभूति बटोरेगा लेकिन अगर भारत देश ने कोरोना वायरस पर विजय पा ली तो ये भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
ये जीत भारत को विश्व के समक्ष विश्वगुरु की तरह पेश करेगी। सम्पूर्ण विश्व क़ी नजरें भारत पर ही होंगी चाहे वो मार्गदर्शन के लिए हो या व्यापार के लिए। वह स्तिथि भारत के हर नागरिक की प्रतिव्यक्ति आय को बढ़ाने और भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने में मदद करेगी। भारतीय सनातन संस्कृति की महत्ता विश्व बिरादरी को समझ आएगी औऱ भारतीय संस्कृति का महत्व बढ़ेगा।

हे भारतवर्ष के महान नागरिकों, अपने-अपने घरों में रहिए।भारत सरकार के दिशानिर्देशों का यथावत पालन कीजिये क्योंकि आज किया गया त्याग ,भारतवर्ष के लिए एक स्वर्णिम भविष्य की नींव रखेगा।

जय हिंद जय भारत

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COVID-19 ,क्या ये साजिश ही वैश्विक संगठनों की ताकि चीन को अलग-थलग किया जा सके?

क्या ये साजिश ही वैश्विक संगठनों की ताकि चीन को अलग-थलग किया जा सके?

आज के परिदृश्य में स्पष्ट है कि विश्व का प्रत्येक देश औऱ उसके नगरिक चीन को कोरोना वायरस का जिम्मेदार मान रहे हैं। कुछ लोग तो आवाज उठा रहे हैं कि चीन पर हर तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाए उसके इस नीच कार्य के कारण।

यद्यपि कुछ लोग इसका कारण अमेरिका को मान रहे हैं ।
यदि आप चीन के  पिछले कारनामों को देखें तो ऐहसास होता है कि इस वायरस के पीछे चीन का हाथ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

चीन औऱ अमेरिका दोनों ही अतिमहत्वाकांक्षा वाले देश हैं जिनके लिए वैश्विक दबदबा हर स्तिथि में आवश्यक है औऱ इसके लिए वो बड़े से बड़ा निर्णय लेने से नहीं कतराते फिर चाहे उसके लिए उन्हें अपने सैनिकों की जान ही क्यूँ न गंवानी पड़े लेकिन दोनों देशों की वैश्विक दबदबे को लेकर सोंच में थोड़ा अंतर है।

जहाँ अमेरिका कम नुकसान में अधिक फायदे की सोंच रखता है वहीं चीन इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता। चीन के लिए उसका सुनहरा भविष्य ही मायने रखता है।
दोनों देशों की फितरत के आधार पर चीन पर शक गहरा जाता है कि शायद चीन ही इसके पीछे जिम्मेदार है।

परन्तु खोज के आधार पर ये पाया गया कि इस वायरस को किसी लैब में नहीं बनाया गया है बल्कि यह कोरोना वायरस श्रेणी का ही एक वायरस है।
अभी तक ये माना जा रहा है कि यह वायरस चीन के वुहान शहर से फैला लेकिन जिस व्यक्ति में सबसे पहले covid-19 के लक्षण दिखे उसका वुहान की मृत और जीवित जानवरों की बाजार से कोई लेना देना नहीं था तो अभी तक इस वायरस के जनक क्षेत्र के विषय मे ज्यादा जानकारी नहीं है।

इस वायरस की वैक्सीन सन 2021 तक आने की सम्भावना है,तब तक के लिए अपना ख्याल रखिये,सरकार के निर्देशों का पालन कीजिये।


ऋषभ सचान

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कोरोना वायरस के दौर में घर बैठे पैसे कमायें, कैसे??

दोस्तों, कोरोना वायरस के इस दौर में सरकार ने लगभग पूरे देश में lock down किया हुआ है तो अब ऐसे में लोगों का घर पर टाइम नहीं व्यतीत हो रहा है और सभी मौके की तलाश में हैं कि घर बैठे पैसे कैसे कमायें।

Source: Google

तो दोस्तों ज्यादा दिमाग न चलाये क्योंकि lock down की वजह से हर तरह का व्यापार बन्द है तो तुम्हें कौन घर बैठे पैसे देगा। चलो कुछ समय व्यतीत करो घर वालों के साथ औऱ पढ़ो इस पोस्ट को बहुत उपयोगी है:-

क्या होगा भविष्य में ?? क्या होगा इस महामारी से जंग जीतने के बाद??

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क्या होगा भविष्य में ?? क्या होगा इस महामारी से जंग जीतने के बाद??

ईश्वर जाने आगे क्या होगा परन्तु आज रूह काँप जाती है आने वाले भयंकर मंजर को सोंचकर.......

आज पूरे देश में जनता कर्फ़्यू है जिसकी वजह से सभी सड़कें लगभग सुनसान पड़ी हैं।

सुबह-सुबह मौसम ख़ुशगवार था परंतु दोपहर से ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी क्षेत्र में माहमारी के कारण अकाल मृत्यु हुईं हों। दिल को भयभीत कर देने वाला सन्नाटा है। कुत्तों के भौंकने की भी आवाज नहीं आ रही है।

ईश्वर जाने आगे क्या होगा परन्तु आज रूह काँप जाती है आने वाले भयंकर मंजर को सोंचकर.......

देश की सम्पूर्ण जनता ने सराहनीय सहयोग दिया है परंतु कुछ लोग आज भी स्तिथि की गम्भीरता को नहीं समझ पा रहे या समझना नहीं चाहते जिसका खामियाजा सम्पूर्ण मानवजाति को भुगतना पड़ सकता है।

सोंचिये क्या होगा यदि किसी शहर क़ी सम्पूर्ण आबादी इस महामारी के चपेट में आ जाये ? एक फलता-फूलता शहर रातों-रात वीरान हो जाएगा। सबका कमाया हुआ धन-दौलत यहीं पड़ी रह जाएगी।सबका अहंकार यहीं रह जायेगा।

दोस्तों, आज के वक़्त को अपने रिश्तों को बुनने में ऊपयोग कीजिये। रिश्तों को समझिए, उनके महत्व को समझिए।
साथ बैठिए, पुराने और बचपन वाले खेल खेलिए। अंताक्षरी खेलिए,लूडो खेलिए, पत्ते खेलिए और भी तमाम खेल हैं ,खूब खेलिए और दिलों को जोड़िए।

मेरी बात को गाँठ बाँध लीजिए कि यही छोटी-छोटी यादें आपके जीवन में स्फूर्ति जगाएँगी। एक-दूसरे की मदद कीजिये ,खुश रहिए।

--ऋषभ सचान

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्तापि न शोषयति मारूतः।।

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कोरोना (Corona) पर योगी सरकार का बड़ा फैसला, क्या होगा अब दिहाड़ी मजदूरों का?

योगी सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों के लिए एक फ़ैसला लिया है जिससे उन मजदूरों के पेट पर लात नहीं पड़ेगी।

Source:- Google & Hindustan paper

योगी सरकार ने एलान किया है कि सभी पंजीकृत मजदूरों को एक हजार रुपये एक निश्चित अवधि में दी जाएगी। DBT के जरिये पैसे भेजे जाएंगे। जो मजदूर पंजीकृत नहीं है, उनके लिए प्रत्येक कॉन्ट्रेक्टर को आदेश है कि वो उन मजदूरों को नियमित रूप से वेतन दें। सरकार उन कॉन्ट्रेक्टर को बाद में पैमेंट करेगी।

एक करोड़ 65 लाख लोगों को फ्री अनाज उपलब्ध कराने के तत्काल आदेश हैं राशन कोटेदारों के लिए।

यह योगी सरकार का बेहतरीन निर्णय है।

धन्यवाद भारत और उत्तर प्रदेश सरकार को

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Narendra Modi का कोरोना से बचाव के लिए सन्देश, 22 मार्च ख़ास दिन भारतीय इतिहास में।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी का जनता के नाम सन्देश औऱ आग्रह ताकि देश कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचाया जा सके।

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Corona Virus - ले चुका है 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को चपेट में। हल्के में न लें और समझें इसकी असलियत को।

“सारी दुनिया के लिए सन्देश,, जिन्हें ये पता नहीं है कि उनका सामना किस आपदा से होने वाला है”

यह मेरे facebook मित्र तबिश सिद्दीकी जी के द्वारा लिखा गया है। सम्पूर्ण मानवजाति की रक्षा और भारत वासियों को जल्द से जल्द आगाह करने के लिए मैं बिना किसी इजाजत के इसे अपने ब्लॉग में पोस्ट कर रहा हूँ।

तबिश सिद्दीकी की भाषा में,

ये ट्विटर थ्रेड (मैसेज श्रंखला) है इटली के लोगों की.. मैं इसे अपने हिंदी भाषी दोस्तों के लिए ट्रांसलेट कर रहा हूँ.. पढ़िए और समझिये कि हमारा और आपका सामना किस से होने वाला है

Source:- Google & Amar Ujala

अगर आप अभी भी अपने दोस्तों के साथ घूम  रहे हैं, होटल जा रहे हैं, पार्टी कर रहे हैं और ऐसे दिखा रहे हैं जैसे ये (कोरोनावायरस) आपके लिए कोई बड़ी मुसीबत नहीं है, तो आप बहुत बड़े भ्रम में हैं.. अपने आप को संभाल लीजिये.. नीचे का सारा मैसेज एक इटालियन लोगों के द्वारा पोस्ट किया गया है.. जो कुछ भी उन्होंने जैसा भी लिखा है उसे वैसा ही लिखा जा रहा है:

“सारी दुनिया के लिए सन्देश,, जिन्हें ये पता नहीं है कि उनका सामना किस आपदा से होने वाला है”

जैसा कि मैं समझता हूँ इस वक़्त सारी दुनिया को पता है कि इस वक़्त सारा इटली क्वारंटाइन किया जा चूका है.. यानि उसे पूरी तरह से बंद किया जा चुका है.. ये स्थिति बहुत बुरी है.. मगर उन लोगों के लिए ज़्यादा बुरी है जो ये सोचते हैं कि ये उनके साथ नहीं होगा

हमे पता है कि आप कैसा सोच रहे हैं.. क्यूंकि हम भी पहले ऐसे ही सोच रहे थे..

आईये देखें कि ये सब कैसे शुरू हुवा:

स्टेज प्रथम (पहला चरण):

आपको पता होता है कि कोरोना वायरस ऐसी कोई चीज़ है.. मगर आपके देश में ये अभी अभी दिखना शुरू हुवा है.. इसलिए आप सोचते हैं कि डरने की कोई बात नहीं हैं.. क्यूंकि ये बस एक तरह का ज़ुकाम है.. और वैसे भी मैं 75+ साल का हूँ  नहीं इसलिए मुझे इस से क्या डरना

फिर प्रथम चरण आगे बढ़ता है:

और आप सोचते हैं कि ये क्या हर कोई पागल  हो रहा है मास्क और टॉयलेट पेपर के लिए.. ऐसा कुछ तो होने वाला है नहीं.. मेरी ज़िन्दगी तो आराम से चलती रहेगी

फिर आता है..

स्टेज द्वितीय (दूसरा चरण)

धीरे धीरे..  देश में मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है.. और सरकार एक दो शहरों कि सीमाएं प्रतिबंधित कर देती है.. और आपको ये समझाती है कि डरने की कोई बात नहीं है.. सब कुछ ठीक है (22 फ़रवरी को ऐसा इटली में हुवा था)

द्वितीय चरण यानि दूसरा चरण आगे बढ़ता है:

कुछ लोगों की  मौतें होती हैं.. मगर वो सब बूढ़े लोग होते हैं.. और मीडिया उस पर हाय तौबा मचाता है... हम सोचते हैं कि ये अच्छी बात नहीं है.. लोग अपने दोस्तों यारों से मिलते रहते हैं.. नार्मल ज़िन्दगी चलती रहती है.. और हमे ये लगता है कि हमे कुछ नहीं होगा

त्रित्तीय चरण (तीसरा चरण)

धीरे धीरे संक्रमित लोगों का आंकडा बढ़ने लगता है.. एक दिन में ही दुगने लोग संक्रमित हो जाते हैं.. मौतों का आंकड़ा बढ़ जाता है.. और सरकार चार बड़े इलाक़ों को प्रतिबंधित कर देती है जहाँ से सब से ज्यादा केस हैं (ये 7 मार्च को इटली में होता है).. फिर इटली के पच्चीस 25% लोगों को घरों में बंद कर दिया जाता है

फिर आता है..

स्टेज तृतीय (तीसरा चरण)

फिर कुछ क्षेत्रों में स्कूल, बार और रेस्टोरेंट बंद कर दिए जाते हैं.. मगर ऑफिस अभी भी खुले हैं.. सरकारी नियमों को मीडिया और अखबार पहले ही प्रकाशित कर देते हैं

स्टेज तृतीय आगे बढ़ता है:

इटली के क़रीब दस हज़ार लोग, जिन्हें दूसरे  इलाक़ों में सरकार ने रोक कर रखा था वो एक ही रात में वहां से निकलकर अपने अपने घर वापस पहुँच जाते हैं.. और इटली के लगभग पिछत्तर प्रतिशत लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त रहते हैं

स्टेज तृतीय यानि तीसरा चरण और आगे बढ़ता है:

इटली के लोग अभी भी इस वायरस की आपदा नहीं समझ पा रहे हैं.. हर जगह इटली में लोगों को ये बताया जा रहा है कि थोड़ी थोड़ी देर में अपने हाथ धुलें.. लोग ग्रुप में या भीड़ में न खड़े हों.. टीवी पर हर दस मिनट में ये समझाया जा रहा है.. मगर ये बातें लोगों के दिमाग़ में नहीं बैठ रही हैं

फिर आता है..

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण):

इटली में हर जगह स्कूल और कॉलेज कम से कम  एक महीने के लिए बंद कर दिए गए हैं.. नेशनल हेल्थ इमरजेंसी लगा दी जाती है.. सारे अस्पतालों को ख़ाली करवा के कोरोनावायरस के मरीजों के लिए जगह बना दी जाती है

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) और आगे बढ़ता है:

अब इटली में डॉक्टर और नर्सों की कमी पड़ने लगी है.. अब जितने भी डॉक्टर रिटायर हो चुके हैं उन्हें भी वापस नौकरी पर बुला लिया जाता है.. जिस छात्रों कि डॉक्टरी की पढाई का दूसरा साल हुवा है उन्हें भी नौकरी पर बुला लिया जाता है.. किसी भी डॉक्टर और नर्स के लिए कोई भी शिफ्ट नहीं है.. चौबीस घंटे काम करना है सबको अब.. डॉक्टर और नर्स भी संक्रमित हो रहे हैं अब और  उन लोगों से उनके परिवारों को भी वायरस अपनी चपेट में ले रहा है

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) और आगे बढ़ता है:

अब निमोनिया के बहुत ही ज्यादा मरीज़ बढ़ गए हैं... और बहुत सारे लोगों को ICU की ज़रूरत है और अब ICU में सबके लिए जगह नहीं है.. इटली में अब वो स्थिति आ चुकी है जहाँ डॉक्टर अब सिर्फ़ उन्हीं का इलाज कर रहे हैं जिनके बचने की उम्मीद होती है.. मतलब अब बूढ़े, और अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों का इलाज डॉक्टर नहीं कर पा रहे हैं क्यूंकि अब डॉक्टर को क्रोना  वायरस  वाले मरीजों को ही बचाना है.. क्यूंकि अब अस्पताल में सभी के लिए जगह नहीं बची है

स्टेज चतुर्थ (चौथा चरण) आगे बढ़ता है:

अब लोग मर रहे हैं क्यूंकि अस्पतालों और ICU में जगह नहीं है.. मेरे एक डॉक्टर दोस्त ने मुझे कॉल कर के बताया कि उसने तीन लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया क्यूंकि जगह नहीं थी.. नर्स रो रही हैं क्यूंकि वो मरते हुवे लोगों के लिए कुछ नहीं कर सकती हैं सिवाए उन्हें ऑक्सीजन देने के

मेरे एक दोस्त का रिश्तेदार कल मर गया क्यूंकि उसका इलाज नहीं हो पाया.. अब क्रोना वायरस हर तरफ़ पूरी तरह से फैल चुका है

फिर आता है..

स्टेज पांच (पाँचवाँ चरण):

याद कीजिये उन बेवकूफों को जिन्हें सरकार ने शुरुवात इटली के कुछ राज्यों में रोक के रखा था, क्वारंटाइन किया था मगर वो अपने अपने घर वापस चले आये थे? उन्हीं की वजह से अब सारी इटली को मार्च 9 को क्वारंटाइन कर दिया गया

अब सरकार का एक ही लक्ष्य है कि कैसे इसे ज्यादा से ज्यादा फैलने से रोका जाय

लोगों को अपने काम पर जाने दिया जा रहा है.. ज़रूरी सामान की खरीदारी करने दी जा रही है.. व्यापार सारे खोल के रखे गए हैं.. क्यूंकि अगर ऐसा न किया तो सारी इकॉनमी धराशायी हो जायेगी.. मगर अभी भी आप अपने इलाक़े से बाहर नहीं जा सकते हैं जब तक आपके पास उसके लिए कोई बहुत ज़रूरी वजह न हो

मगर अभी भी एक समस्या बनी हुई है.. क्यूंकि कुछ लोग समझते हैं कि उन्हें कुछ नहीं होगा.. वो अभी भी दोस्तों के साथ बाहर जा रहे हैं... घूम रहे हैं ग्रुप में.. शराब पी रहे हैं और ऐश कर रहे हैं

फिर आता है..

स्टेज छः (छठां चरण):

दो दिन पहले ये घोषणा कर दी गयी कि अब सारे व्यापार, शौपिंग माल, रेस्टोरेंट, बार और हर तरह की दुकाने बंद रहेंगी.. सिर्फ़ सुपर मार्केट और दवाखाने के अलावा.. और अब आप सिर्फ़ तभी अपने इलाके से कहीं बाहर जा सकते हैं अगर आपके पास उसकी कोई बहुत बड़ी वजह है और उसके लिए आपके पास एक सर्टिफिकेट होना चाहिए

उस सर्टिफिकेट में आपके बारे में सारी जानकारी होती है.. जिसमे आपका नाम, पता और आप कहाँ से आ रहे हैं और कहाँ जा रहे हैं ये लिखा होता है

जगह जगह पुलिस के चेक पॉइंट बने हैं जहाँ आपको चेक किया जाता है

इटली में अगर अब आप अपने घर से बाहर अब पकडे जाते हैं तो आपके ऊपर 206 पौंड का जुर्माना लगाया जाता है.. अगर आप बहार निकलते हैं और आप क्रोना वायरस से संक्रमित हैं तो आपको एक से लेकर बारह साल की जेल होगी

आख़िरी सन्देश:

ये मैं १२ मार्च को लिख रहा हूं और इस वक़्त तक के ये हालात है जो मैंने ऊपर बताया.. इसका ध्यान रखिये कि ये सब बस हमारे यहाँ दो हफ्ते के अंदर हो गया.. सिर्फ़ पांच दिन लगे स्टेज तीन से आज तक के दिन तक आने में हमे

दुनिया के दूसरे देश अभी धीरे धीरे उन चरणों में पहुँच रहे हैं जिनसे हम गुज़र चुके हैं.. इसलिए मुझे आप लोगों से ये कहना है कि “आपको कोई अंदाज़ा नहीं है कि आप के साथ क्या होने वाला है”

क्यूंकि दो हफ्ते पहले मैं आपके ही जैसा सोचता था और मुझे लगता था कि हमे कुछ नहीं होगा.. और ये सब इस वजह से नहीं हो रहा है कि ये वायरस बहुत खतरनाक है.. बल्कि ये सब इस वजह से हो रहा है कि ये वायरस ऐसी परिस्थितियां पैदा कर देता है जिसका सामना करने में हम सक्षम नहीं हैं

ये देख कर बहुत दुःख हो रहा है क्यूंकि कुछ देश ये सोच रहे हैं कि उनको कुछ नहीं होगा.. और वो इसके लिए ज़रूरी बचाव नहीं कर रहे हैं.. जबकि वो समय रहते अगर बचाव कर लें तो बहुत फायदा होगा

इसलिए.. कृपया अगर आप इसको पढ़ रहे हैं तो सजग हो जाईये.. क्यूंकि इसको इग्नोर करने पर इस समस्या का हल नहीं निकलेगा.. अमेरिका जैसे देशों में ऐसे कितने लोग होंगे जो संक्रमित होंगे और उनका पता नहीं चल पाया होगा

हमारी इटली की सरकार ने इस बारे में बहुत अच्छा काम किया.. और वो ये किया कि उन्होंने पूरी कोशिश की अब इस वायरस को जहाँ भी हो रोक दिया जाए.. उसके लिए उन्हें बहुत कठोर क़दम  उठाये मगर वो सही थे.. चाइना ने भी इस तरह से इस पर क़ाबू पाया था... सारे इलाके बंद कर के लोगों को घरों में क़ैद कर दिया था

सरकार लोगों की मदद कर रही है.. उनके बैंक की किश्त माफ़ करके और लोगों के व्यापार में मदद कर के.. मुझे ये चीज़ परेशान कर रही है कि अगर ये सारे देशों में हो गया तो क्या होगा

इसलिए अगर आप ऐसे इलाक़े में हैं जहाँ आपके आसपास क्रोना वायरस से संक्रमित मरीज़ हैं.. तो आप बस एक या दो हफ्ते हम से पीछे हैं.. और आप हमारी सारी बातों को धीरे धीरे समझेंगे.. इसलिए मेरी आप लोगों से यही गुजारिश हैं कि आप अपना बचाव ख़ुद करें.. और ऐसा व्यवहार मत कीजिये कि आपको कुछ नहीं होगा.. इसलिए अगर आप रह सकते हैं तो “घरों में ही बंद रहिये”

( @JasonYanowitz के twitter अकाउंट की मैसेज श्रंखला से अनुवादित )


ये है तबिश जी की पोस्ट का लिंक:-

कृपया इसे जरूर पढ़ें और सावधान रहें। आपकी सतर्कता ही आपका बचाव है।

Corona Virus - इसके लक्षण, बचाव व सावधानियाँ।

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दिल्ली में देखा गया जिंदा कोरोना वायरस, सरकार के हाथ पांव फूले।

दिल्ली में देखा गया जिंदा कोरोना वायरस।

Source:- Google

ये है फ़ोटो कोरोना वायरस की।

Source:- Google and Facebook

ये सिर्फ Fun के लिए है इसे seriously न लें।हंसे और हंसाते रहें।

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Corona Virus - क्या वाकई डरने की जरूरत है ?

"Prevention is better than cure."

कोरोना वायरस(Corona Virus) को लेकर पूरे विश्व में एक भय का माहौल बना हुआ है। इस वायरस के कारण पूरे विश्व में मृत्यु का आंकड़ा 5000 से ज्यादा हो चुका है और भारत में यह आंकड़ा 2 पहुँच चुका है।

Source:- Google

WHO(World Health Organization) ने इस वायरस को महामारी घोषित कर दिया है। इस परिस्थिति में हर व्यक्ति अपने स्तर पर सावधानियाँ बरत रहा है, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO औऱ कई पब्लिक हेल्थ अथॉरिटीज ने कुछ बेसिक गाइडलाइन्स जारी किए हैं जिनका अनुसरण(Follow) करके आप अपने ऑफिस(Office) या अन्य जगह पर सिर्फ कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि हर तरह के इन्फेक्शन को फैलने से रोक सकते हैं। दोस्तों आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ये गाइडलाइन्स सनातन संस्कृति के अंतर्गत आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान के द्वरा बताये गए निवारणों से मिलते हैं।

तो आइए मैं बताता हूँ आपको कोरोना वायरस का कारण और उससे बचने के उपाय आयुर्वेद और WHO के अनुसार:-

कोरोना वायरस का कारण (Cause of Corona Virus):-

अभी तक डॉक्टर और वैज्ञानिक पूरी तरह से ये नहीं जान पाए हैं कि कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कैसे फैलता है, हालांकि इससे मिलते-जुलते वायरस खांसी और छींक से गिरने वाली बूँदों के जरिये फ़ैलते हैं।

संक्रमण से कैसे बचें :-

इसलिए आप इस ख़तरे को कम करने के लिए चित्र में दी गयी बातों का ध्यान रख सकते हैं:-


Source:- Dainik Jagran

आयुर्वेद के अनुसार भी आप कई चीजों को फॉलो करके अपनी प्रतिरोधक(Immunity) क्षमता को बढ़ा सकते हैं जिससे कि आपका शरीर किसी भी तरीक़े के वायरस से लड़ सके।

1. सबसे पहले भोजन के उपरान्त जल पीने को आदत को त्यागिये। भोजन उपरान्त कम् से कम आधे घण्टे तक पानी न पिएं।
2. अपनी दिनचर्या में गर्म या गुनगुने(Luke Warm) पानी को शामिल कीजिये। सुबह फ्रेश होने से पहले आधा से एक लीटर गुनगुना पानी जरूर पियें।
3. तुलसी पत्ती, नीम पत्ती आदि को दिनचर्या में शामिल करों
4. ठण्डी चीजें जैसे आइसक्रीम ,कोल्ड्रिंक इत्यादि से बचें।
5. मांसाहारी(Non-Veg) भोजन को पूरी तरह से त्याग दें। अगर आप खाते भी हैं तो अच्छी तरह से पका लें।# कोरोना वायरस का आकार 400-500 माइक्रोमीटर होता है, इसलिए इससे बचाव के लिए किसी 'विशेष मास्क' की आवश्यकता नही है। आप 'साधारण मास्क अथवा रूमाल' के उपयोग से भी इससे अपना बचाव कर सकते हैं।

# यह विशेषकर छिंकने अथवा खाँसने पर निकलने वाले द्रव के साथ बाहर आता है। द्रव के साथ बाहर आने के कारण व अपने आकार के कारण यह ज्यादा समय तक हवा मे नही रह पाता है और इसी कारण यह जल्द ही जमीन पर आ जाता है।

# यह वायरस किसी भी प्रकार की धातु पर 12 घण्टे तक जीवित रह सकता है।

# हाँथो मे यह वायरस 10 मिनट तक जीवित रह सकता है।

# यह वायरस किसी भी प्रकार के कपड़े पर 9 घण्टे तक जीवित रह सकता है।

# कपड़ों को धोने पर व धूप मे 2 घण्टे सुखाने पर यह वायरस निष्क्रीय हो जाता है।

# यह वायरस बाह्य वातावरण मे 26-27 डिग्री सेल्सियस के ऊपर निष्क्रीय हो जाता है।

# हाँथो को बार-बार धोने से इसके संक्रमण से बचा जा सकता है।

# गर्म पानी के सेवन से, कुनकुने पानी या नमक मिले कुनकुने पानी के साथ कुल्ला करने पर इस वायरस के संक्रमण से बचा जा सकता है।

ध्यान देने वाली बात ये यह है कि वायरस के शुरुआती स्तर के मामलों और हल्के-फुल्के लक्षणों वाले मामलों को अभी गिना नहीं गया है, इसलिए संक्रमित मामलों की सामने आई संख्या पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं कही जा सकती है।

कोरोना वायरस(कोविड 19) के लक्षण:-

Source :- WHO

इन लक्षणों का ये मतलब नहीं है कि कोरोना वायरस के संक्रमण है क्योंकि कुछ औऱ वायरसों में भी इसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं जैसे जुक़ाम औऱ फ्लू में।

इस वायरस के गम्भीर मामलों में निमोनिया, साँस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी, किडनी का फेल होना या फिर मृत्यु भी हो सकती है। बुजुर्ग या उम्रदराज लोग जिन्हें पहले से ही कोई बीमारी(जैसे डायबिटीज, हार्ट-अटैक, अस्थमा) है, उनके मामलों में खतरा ज्यादा गम्भीर हो सकता है।

आजकल काफा लोग सलाह देते हैं कि मास्क लगाकर रहो जबकि ये आपके लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है। स्वस्थ्य व्यक्ति के लिए बेहतर है को वो मास्क का उपयोग न करे अन्यथा वह खुद के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। अगर मास्क उपयोग करना ही चाहते हैं तो इसका उपयोग सिर्फ सफ़र के दौरान ही करें और ज्यादा लंबे समय तक उपयोग ना करें। एक से ज्यादा मास्क अपने पास रखें। यदि मास्क लगाये हुए आपको छींक आती है तो मास्क को हर 4-5 घण्टे में बदलते रहें और धुलते रहें।

फेस मास्क कई तरह के हो सकते हैं। नीचे दिए गए चित्र में आप मास्क में अंतर समझ सकते हैं।

Source : 3-M, Getty

स्वयं को अकेला कैसे रखें ताकि दूसरे संक्रमित न हों :-

अगर आप संक्रमित क्षेत्र से आये हैं या किसी संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में रहे हैं तो आपको अकेले रहने की सलाह दी जा सकती है। ऐसे में घर पर रहें, सार्वजनिक वाहनों में यात्रा न करें घर में मेहमानों को आमंत्रित न करें। 14 दिन तक ऐसा करें ताकि संक्रमण का खतरा कम हो जाये।

कोरोना वायरस के मरीजों की देखभाल करने वाले हॉस्पिटल कर्मचारियों के लिए आवश्यक सलाह :-

Source:- WHO

अभी कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं है तो जब तक आप ठीक ना हो जायें, तब तक दूसरों से अलग रहना होगा।

"Prevention is better than cure."

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Nawazuddin Siddiqui के संघर्ष की दास्ताँ, जो आएगी आपके काम।

An Inspirational Story of Nawazuddin Siddiqui.

नवाजुद्दीन सिद्दीकी के संघर्ष की कहानी।

20 साल पहले मैं खड़ा हुआ था एक ऑफिस में जाकर तो मुझसे पूँछा गया था कि "क्या है ?"
मैंने कहा," एक्टर हैं।"
बोले दिखने से तो लगते नहीं हो कि एक्टर हो।

Pic Credit:- Google

फ़िल्म इंडस्ट्री में हमेशा से ये प्रचलन था कि एक्टर जो होता है वो 6 फुट का होता है और लम्बा-चौड़ा और डोले-शोले होते हैं। मतलब हम तो ऐसे ही चले गए थे ऐसा वो असिस्टेंट डायरेक्टर समझता था। और मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ कि मेरे खुद के रिश्तेदारों ने भी मुझे हतोत्साहित(Demoralize) किया जब मैंने उनसे इक्षा जाहिर की ,कि मैं एक्टर बनना चाहता हूँ। रिश्तेदार बोले कि पहले शक़्ल तो देख ले अपनी। सब का यही सोंचना था कि 5 फुट का दुबला-पतला और काला-कलूटा आदमी कैसे एक्टर बन सकता है। ये सच भी है, उस वक़्त हर किसी के जेहन में यही बात थी।
मुझे खुद नहीं पता था कि फ़िल्म इंडस्ट्री में मेरा क्या होगा लेकिन एक ज़िद थी और इसी ज़िद ने हौसला दिया।
इन सब विपरीत(odd) और विषम परिस्थितियों के बावजूद मैं मुम्बई गया और मेरे दिमाग मे एक बात थी कि जो सब कर रहे हैं वो नहीं करना है,कुछ अलग करना है।
"तो अलग क्या करूँ ?" उसके लिए ट्रेनिंग(training) की जरूरत थी जो मैंने दिल्ली(Delhi) में National School of Drama से पूरी की। 3 वर्ष मैंने एक्टिंग की पढ़ाई की वहाँ पर और समझा कि इस व्यक्तित्व(Personality) में मुझे किस तरह की एक्टिंग को जरुरत है जिससे लोगों को प्रभावित(Impress) कर सकूँ।

Pic Credit:- Google

आपको बता दूँ कि आप जो भी काम करें उसमें एक्सपर्ट होना बहुत जरूरी है। किसी चीज को बारीकी से जानने और समझने के लिए ट्रेनिंग की और एक्सपर्ट्स के अनुभवों की जरूरत होती है।

इन सबके बाद पहुँच गया मैं मुम्बई। जब-जब काम माँगने जाता, तो यही सुनने को मिलता कि पहले हुलिया तो देख अपना। और बात भी सही थी क्योंकि उस समय तक हीरो(Hero) की पर्सनालिटी को अलग ही रूप में समझा जाता था। लेकिन मैं आत्मविश्वास से भरा हुआ था अपनी ट्रेनिंग की वजह से और मुझे अपनी ड्राफ़्ट के बारे में पता था। मुझे विश्वास था कि आज नहीं तो कल,देर-सबेर कुछ न कुछ तो होगा ही और मेरा भी नम्बर आएगा।

मैंने कभी खुद को समय के बन्धन में नहीं बाँधा कि 2साल, 5 साल कोशिश करूँगा, अगर हुआ तो ठीक नहीं दूसरे क्षेत्र में करियर बना लूँगा। इसीलिए आप भी कभी खुद को टारगेट में मत बाँधिये।

जिस चीज का जुनून होता है उसे दिलाने के लिए पूरी क़ायनात एक जुट हो जाती है,लेकिन आपको उसके लिए ज़िद्दी बनना पड़ता है। आपको कई सारे बलिदान(Sacrifices) देने पड़ते हैं,क्योंकि ये आपने चाहा है। परीक्षा देनी पड़ती है। जितना बड़ा लक्ष्य होगा उतनी बड़ी परीक्षा देनी पडेगी। आसान काम नहीं है। अगर छोटे-छोटे लक्ष्य बनायेंगे तो छोटों में ही निपटारा हो जाएगा। हमेशा अपने आप को बड़ा लक्ष्य दो और उसके लिए खुद को असुविधाजनक(Uncomfortable) zone में डालो। असम्भव को सम्भव करने का जुनून होना चाहिए। आज जो दुनिया मे इतने सारे एक्सपेरिमेंट हुए हैं सारे के सारे पागलपन की हद तक पहुँचे हुए जुनून की वजह से ही हुये हैं।

जब आप कुछ करते हैं तो असफल भी होते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वो असफलताएँ बेकार हो गयीं। वो असफलताएँ भी आपको कुछ न कुछ सिखा देती हैं जो आपकी सफलता की सीढ़ी बनता है।

तो जब हम लोग मुम्बई आये,हमें पता था कि हमारे पास पर्सनालिटी नहीं है, हमारे पास बैकअप नहीं है। हमारे दादा-परदादा इंडस्ट्री में नहीं हैं। इसलिये आम लोगों के बीच घुसे रहते थे,उनके अनुभवों को सुनते थे, उनका अवलोकन(Observe)करते थे। लगभग 10-12 सालों तक मैंने सिर्फ़ 5-10 सेकंड के ही रोल किए लेकिन अच्छी बात ये थी कि मैं हमेशा लोगों के बीच ही रहता था। और तब एहसास हुआ मुझे कि तरह-तरह के लोग हैं लेकिन हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक ही तरह की एक्टिंग होती है।
दुनिया मे लाखों करोड़ों लोग हैं और सब अलग-अलग स्वभाव,चाल-ढाल के हैं ,लेकिन हमारी इंडस्ट्री में तो सिर्फ एक ही तरह की एक्टिंग हो रही है,तब मुझे एहसास हुआ कि अब मैं जो भी रोल करूँगा उसमें इन्हीं में से किसी की छाप होगी। जैसे बाला साहब ठाकरे, मंटो, गणेश गायतोंडे इत्यादि। तो ये कब हुआ जब मैं लोगों के बीच रहा ,उन्हें समझा। ये एहसास मुझे तब हुआ जब मुझे सफलतायें मिलने लगीं तकरीबन 15 साल बाद।

तो जो आपका संघर्ष का समय होता है वही आपका सुनहरा अवसर होता है क्योंकि उस समय लिए गए अनुभव को ही आप अपनी सफलता में लगाकर उसमें निरन्तरता बनाये रखते हैं। एक बार सफल होने के बाद आपको संघर्ष के दिनों में लिए गए अनुभवों को दुबारा से जीने का मौका नहीं मिलता। इसलिए आज मैं सोंचता हूँ कि जो मैंने 10-15 साल बिना काम के गुजारे वो आज मेरे काम आ रहा है और यही कारण है कि लोग मेरे निभाये गए किरदारों से खुद को जोड़ पाते हैं। और मैं समझता हूँ कि एक अभिनेता के तौर पर यही मेरी सबसे बड़ी जीत है।

ये बात सत्य है कि संघर्ष के दिन आसान नहीं होते क्योंकि मैंने तो उन दिनों की यादों और अनुभवों को सिर्फ 5 मिनटों में बयाँ कर दिया परन्तु उन दिनों की मैंने जिया है तो उसका एहसास भी मुझे ही सबसे ज्यादा है।

जाहिर है संघर्ष के दिनों में त्याग भी बहुत करने पड़ते हैं। अरे भाई जब खुजली आपको है तो मिटानी भी खुद ही पड़ेगी। आज जो आप हैं आपने बनना चाहा था और अगर आपके अन्दर निराशा आ रही है तो आप तो कहीं शिकायत भी नहीं कर सकते क्योंकि बड़े लक्ष्य की खुजली भी आपको ही थी।

तो जब 10-12 साल यूं ही बीत गए 5-10 सेकंड के किरदारों में तो मुझमें भी निराशा के भाव आने लगे,कि आगे कुछ हो पायेगा या नहीं, बड़ा काम मिलेगा या नहीं वगैरह-वगैरह।
मेरी माँ से पत्रों के जरिये बातचीत होती थी उन दिनों। जब माँ को एहसास होने लगा कि मैं टूट रहा हूँ तो वो पत्र के अंत मे एक लाइन जरूर लिखती थीं कि, "12 साल में तो कचरे के दिन भी बदलते हैं ,तू तो इंसान है तो तेरे दिन भी बदलेंगे"।

तो आपको इस तरह की प्रेरक( motivational) पँक्तियों, कविताओं, कहानियों पर विश्वास रखना होगा क्योंकि यही आपके संघर्ष के दिनों में आपकी सबसे बड़ी साथी होती हैं और आपको अंदर से मजबूती देती उन दिनों को पार करके अपने लक्ष्य को पाने में।

मैं बुढ़ाना गाँव, जिला मुजफ्फरनगर से ताल्लुक़ रखता हूँ। उस वक़्त ज्यादातर हम लैम्पों में ही पढाई करते थे क्योंकि लाइट तो मुश्किल से घण्टे भर के लिए आती थी। हमारे लिए दिल्ली मुम्बई जैसे बड़े शहर हौव्वा थे। जब मैं मुम्बई आया था 10-15 दिन तो घर से बाहर ही नहीं निकला इस शहर की रफ्तार देखकर, मन मे ख़्याल आता था कि पकड़ पाउँगा इस रफ़्तार को ? क्या मैं चल सकूँगा इस रफ़्तार के साथ? तो इस तरह के डर थे मन के किसी कोने में।

लेकिन मैं ऐसी जगह आ चुका था कि वापस नहीं जा सकता था। वापस जाने का मतलब था खुद पर और अपने सपने पर तोहमत लगवाना। यार-दोस्त ,रिश्तेदार सब यही कहते कि आ गए वापस,हमने तो पहले ही कहा था कि शक़्ल देख ले अपनी।
तो इन सब डरों की वजह से सोंच लिया था कि अब जो भी जीना-मरना है वो मुम्बई में।सफलता अगर 30 साल बाद भी मिलेगी उसके लिए भी तैयार रहना चाहिए,ये मैंने सोंच लिया था।

सफलता की कोई तारीख नहीं होती। आप जिस भी क्षेत्र में हों, जुनून के साथ काम को करते रहिये। समय के साथ आपको उसकी बारीकियाँ समझ मे आती हैं जो आपकी सफलता में सहायक होती है और उसी क्षेत्र में नई सम्भावनाओं को तलाशने में मदद करता है और यही होता है आपका अनुभव।
जैसे एक दर्जी चाहे तो हजार तरह के पैंट बना सकता है और अच्छी कमाई कर सकता है,उसके लिए उसके अंदर अपने काम के प्रति विश्वास, जुनून, नया सीखने और प्रवीणता(Perfection) की ललक होनी चाहिए।

थोड़े में ज्यादा समझिये और जुट जाइये जुनून से अपने लक्ष्य को पाने के लिए।

My best wishes to all of you.

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